*मध्य भारत संपादक अली असगर बोहरा✍️*
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सूरत । दाऊदी बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु परमपावन सैयदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन साहब(तउस) ने अपने और अपने दिवंगत पिताश्री के जन्मदिवस के अवसर पर मस्जिद-ए-मोअज्ज़म में वाइज़ (धर्मसभा) फरमाई। अपने प्रवचन में, उन्होंने एक बेहतर जीवन जीने के लिए समाज का मार्गदर्शन करते हुए एक कलाकार के गुणों को रेखांकित किया। इस अवसर पर भारत और विदेश से लगभग 85,000 दाऊदी बोहरा सूरत में एकत्रित हुए।
सैयदना सैफ़ुद्दीन साहब (तउस) ने समझाया कि एक कलाकार सबसे पहले अपने मन में एक चित्र देखता है, सावधानीपूर्वक उस पर काम करता है और फिर उसे जीवंत बनाता है। उन्होंने संतुलन और अनुपात के महत्व पर बात की, जो गुण किसी कलाकृति को सुंदरता प्रदान करते हैं। इन गुणों का उदाहरण देते हुए उन्होंने दर्शाया कि कैसे एक व्यक्ति को उसी स्पष्टता और उद्देश्य के साथ अपने जीवन को आकार देना चाहिए, और एक ऐसा संतुलन बनाना चाहिए जो इसके विभिन्न पहलुओं को निखारे।
सैयदना सैफ़ुद्दीन साहब (तउस)ने समाज को सुख-शांति और सौहार्द के साथ रहने तथा अपने पड़ोसियों के प्रति प्रेम और करुणा की भावना रखने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
यह अवसर दाऊदी बोहरा समाज के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह सैयदना सैफ़ुद्दीन साहब (तउस)और उनके दिवंगत पिता व पूर्ववर्ती परमपावन सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब दोनों के जन्मदिवस का प्रतीक है।
2014 में अपने पिताश्री के इंतकाल (निधन) के बाद, सैयदना सैफ़ुद्दीन साहब ने(तउस) अपने पिता की स्मृति और विरासत को जीवंत रखने के लिए अपने पिता के जन्मदिन के दिन ही अपना जन्मदिन मनाने का विकल्प चुना। इस वर्ष सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन साहब की 116वीं जयंती और सैयदना मुफ़द्दल सैफ़ुद्दीन साहब का 83वां जन्मदिन है।
पिछले कुछ दिनों से ज़ांपा बाज़ार की पुरानी गलियां परिवारों से भरी हुई हैं—कुछ लोग इस ऐतिहासिक क्षेत्र में लौट रहे हैं जहाँ उनके समाज की सदियों से उपस्थिति रही है, जबकि अन्य इसे पहली बार देख रहे हैं। उत्सव की पूर्व संध्या पर, दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए समाज के सदस्यों ने एक थीम आधारित जुलूस (शोभायात्रा) में भाग लिया। सैयदना सैफ़ुद्दीन साहब ने देवड़ी मुबारक में बनाए गए मंच से इस जुलूस को देखा, जो उनका पैतृक निवास स्थान है और अलजामिया-तुस-सैफ़ियाह का घर भी है—वह अरबी अकादमी जो सदियों से समाज के प्रमुख शिक्षण संस्थान के रूप में सेवा दे रही है।
जन्मदिन का यह उत्सव दाऊदी बोहरा समाज के वार्षिक शिक्षण और अध्ययन कार्यक्रम 'इस्तिफ़ादा इल्मिया' के समापन का भी प्रतीक है। लगभग दो सप्ताह तक और कई चरणों में आयोजित इस वर्ष के कार्यक्रम में विभिन्न देशों और पृष्ठभूमियों से हज़ारों प्रतिभागी सूरत आए थे।


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