अग्री भारत समाचार के लिए ब्यूरो चीफ़ मु. शफ़क़त दाऊदी की रिपोर्ट ।
आलीराजपुर । जिले के ग्राम नानपुर में चैत्र मास के पावन अवसर पर सनातन धर्म के नववर्ष के साथ ही गणगौर पर्व की धूम मची हुई है। बाड़ी पूजन के पश्चात श्रद्धालु माताजी के ज्वारों की टोकनिया रथ में रखकर हर्षोल्लास के साथ अपने घर लाए।बाड़ी पूजन गुड़ी पड़वा से नए वर्ष का आरंभ और ग्यारस से माताजी की बाड़ी बोने की परंपरा निभाई गई। अमावस्या से माताजी के 'खेलने' का क्रम शुरू हुआ, जो तीज के दिन पूजन के साथ संपन्न हुआ।
नगर में उत्साह: एकम और दूज से ही नगर की महिलाएं सज-धज कर, ढोल-ताशों के साथ 'पाती' लेकर निकल रही हैं। नगर भ्रमण के दौरान गणगौर के पारंपरिक गीत और झालरिया की गूंज सुनाई दे रही है।। सामाजिक परंपरा: महिलाएं घर-घर जाकर माताजी के मेहंदी के गीत और भजन कर रही हैं, जहाँ 'तमोल' की प्रसादी का वितरण किया जा रहा है।
दो मुख्य स्थानों पर बोई गई बाड़ी
नगर में दो प्रमुख स्थानों पर बाड़ी विसर्जन और पूजन की परंपरा है:
माली समाज की बाड़ी: बुदिया बाबा माली के निवास पर। सार्वजनिक बाड़ी: पंडित ओमप्रकाश नागर के यहाँ। माली समाज के अध्यक्ष मनीष माली और पुजारी राजेश माली ने बताया कि माताजी को रथ में बिठाकर घर लाने के बाद विशेष पूजन किया जाता है। परिवार के जोड़े केले के पत्ते पर माताजी के सम्मुख खीर-भात का भोग लगाकर स्वयं भी उसे ग्रहण करते हैं।
विराम: माताजी दो दिन की 'पावनी' (अतिथि) के रूप में घर पर विराजेंगी।
विसर्जन: माताजी का विसर्जन रविवार को किया जाएगा। यदि कोई यजमान सेवा हेतु माताजी को ले जाना चाहता है, तो वे 'खेड़ा' से माताजी को अपने घर ले जा सकते हैं।बधार्मिक आयोजन: घनश्याम माली ने कहा कि कालिका मंदिर परिसर में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन हो रहा है, जिसमें सभी भक्तों को कथा श्रवण हेतु आमंत्रित किया गया है।


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