जाफला से लौटकर मुफज्जल हुसैन मंडलेश्वरवाला ।
मो. 9754655030
जाफला । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के बड़नगर नगर से लगे हुए ग्राम जाफला में स्थित सैयदी इब्राहिम भाई शहीद की दरगाह आने वाली बारिश के दिनों हरियाली की चादर ओढ़े हुए नज़र आएगी ।
*कैंपस*
दरगाह परिसर में स्थित बागीचे विभिन्न प्रजाति के पेड़ और फूलों से लदे विभिन्न प्रकार के पौधे निहायत ही करीने से मेंटेंड है। दरगाह परिसर के बाहर एक छोटा सा पानी से लबालब भरा हुआ तालाब भी है जिसे एकटक देखना सुकून देता है । दरगाह से लगभग 150 मीटर दूर से ही जब आप गाड़ी से उतरकर पक्के फर्श की पगडंडी से रोजे की तरफ आते है तो आपको यहां की हरित फ़ज़ा सुकून से भर देती है।
*रोज़ा मुबारक*
इब्राहिम जी शहीद का रोजा ऊंचाई में कम है आकार में भी छोटा है लेकिन अन्दर से बहुत साफ सुथरा और करीने से मेंटेंड है । मार्बल के फर्श पर ज़रा सा भी कचरा नहीं दिखाई दिया । कब्र पर लकड़ी की बड़ी तख्ती है जिस पर लकड़ी में ही नक्काशी से आप का नाम और शहादत की तारीख 7 शाबान (हिजरी सन नहीं लिखा हुआ है ) उकेरी हुई है । ये साहेब क्या हस्ती है और इनकी हिस्ट्री के बारे में कोई मालूमात लिखी हुई नहीं है । कब्र लंबाई में कम और चौड़ाई में अधिक है । कब्र पर गिलाफ साफ सुथरा है और कोई फूल वगैरह नहीं है। मुल्ला सिराज भाई बड़नगर बताते है कि यहां दो शहीद पासपास में मदफुन होने से दोनो कब्रें सटी हुई है और दोनों के कब्र के आगे एक एक शहीद स्तंभ भी बन हुआ है किंतु यह गिलाफ से ढका होने से दिखाई नहीं देता है । साथ ही दोनों कब्र पर एक ही गिलाफ ढांकने से तुरबत की चौड़ाई ज़्यादा मालूम पड़ती है । उज्जैन से आए जायरीन कुतुबुद्दीन भाई अत्तार ने बताया कि इस दरगाह पर हर तरह की मन्नत पूरी होती है । जायरीन अक्सर अपने रुमाल गांठ बांधकर रोजे के भीतर पीछे वाले दरवाजे की सिटकनी में बांध जाते है जो साफ देखे जा सकते है ।
एक अन्य जायरीन जो बड़नगर के निवासी ने बताया कि इब्राहिम जी लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व हुए एक बड़े व्यापारी थे उन्होंने 07 बार हज की और दावत की खिदमत भी करते थे । इस जगह से गुजर के वक्त संभवतः लूट के इरादे से उन्हें शहीद कर दिया गया था । शहादत के बाद आप आसपास निवासी किसी मोमिन के सपने में आए और वाकया बयां करते हुए दफन की तवल्ली करने को कहा । भाई ने बताया कि क्षेत्र के दीगर समाज के लोग इब्राहिम जी पर बहुत अक़ीदा रखते है । मन्नत मानते है और पूरी होने पर गाजे बाजे से खुश होकर चढ़ावे के लिए आते है ।
*स्टे एंड फूड*
जायरीन की सुविधा के लिए यहां 05 कमरे बने हुए है और एक बड़ा हाल भी है । एक चौकीदार श्री तुलसीराम हाड़ा जी पूरे समय यहां मौजूद रहते है । खाना बनाने के बर्तन यहां उपलब्ध है बस आपको एक गैस सिलेंडर और कच्चा सामान साथ लेकर जाना होगा । यदि आप खाना बनाने के झंझट में नहीं पढ़ना चाहते है तो हाड़ा जी बड़नगर शहर से कुछेक बोहरा फैमिलीज से रेडिमेड खाना ऑर्डर पर भी दरगाह परिसर में मंगवा देते है । और तो और कच्चा सामान ले जाने पर तुलसीराम जी कुक्स भी अरेंज करने का माद्दा रखते है । कमरे से बाहर सटे हुए शेड्स में बार्बेकयू की भी व्यवस्था मौजूद है। पीछे के रस्ते से आप अपने फोर व्हीलर अंदर तक अपने रूम्स के पिछले हिस्से के सामने तक ला कर आराम से लगा सकते है ।
*भविष्य की योजना*
मजार मुकद्दस और पूरे कैंपस की देखरेख बड़नगर से जाफला दरगाह इंतजामिया कमेटी करती है। कमेटी की और से मुल्ला सिराज भाई ने कॉल चर्चा पर बताया कि अभी मजार में दरगाह ए हकीमी बुरहानपुर की तर्ज पर कुछ और नव निर्माण प्रस्तावित है । मज़ार के पहुंच मार्ग के रोड चौड़ीकरण की भी योजना है जिसे शीघ्र अमलीजामा पहनाया जाना है ।
*पहुंच मार्ग*
इंदौर की और से जाने वाले जायरीन इंदौर से उत्तर दिशा में हातोद , देपालपुर , गौतमपुरा होते हुए बड़नगर पहुंच सकते है हालांकि यह रास्ता टू लेन है लेकिन एडवेंचरियस है । बारिश के मौसम में दोनों और फैले खेतों और असीमित हरियाली से खुदा की खिलकत को निहारने का मौका रस्ते भर मिलता है । हातोद से आगे यशवंत सागर डैम के बैक वाटर के दृश्य लुभावने है जो आपको रुककर फोटो क्लिक के लिए मजबूर करते है । दूसरा रास्ता उज्जैन से बड़नगर होकर भी है । साथियों बारिश के इन दिनों में नेचर और रूह के सुकून को एक साथ हासिल करने के लिए जाफला की और निकल पड़िए।


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