अग्री भारत समाचार से इब्राहिम रिज़वी की रिपोर्ट ।
बड़वानी । कर्बला का नाम सुनते ही बस एक ही नाम याद आता है हुसैन...... । इस्लाम को मानने वाले और खासकर शिया और बोहरा समुदाय के लोगों की एक ही आरजू रहती है की जिदंगी मे खुदा एक बार तो हुसैन की ज्यारत नसीब करें । इन दिनों चेहल्लुम के अवसर पर कर्बला मे इमाम हुसैन की ज्यारत के लिए दुनिया भर से पांच करोड़ से अधिक जायरीन हुसैन की ज्यारत के लिए कर्बला पहुंचते है ।
चेहल्लुम के दस दिन पूर्व से लाखों की तादाद मे हुसैन के अजादार नजफ से कर्बला तक की यात्रा (92 कि.मी.) पैदल तय करते है । हुसैन की ज्यारत करने वालों की पूरे सफर के दौरान जो सेवा वहां होती है उसकों शब्दों मे बांधा नहीं जा सकता । इस वर्ष इंदौर से से मुर्तजा अलीराजपुर वाला, नजमुद्दीन बंदूक वाला अपने चौदह दोस्तों के साथ नजफ से कर्बला की यात्रा जिसे अरबइन कहां जाता है, उसके लिए गए हैं। मुर्तजा अलीराजपुर वाला का मोबाइल पर अपने सफर का जिक्र करते हुए उनकी खुशी का कोई पार नहीं था ।
उन्होंने बताया कि लाखों लोगों के खाने,नाश्ते, आराम तक की सारी सुविधा लेकर वहां के लोगो के साथ दुनिया के कई हिस्सों से लोग दस दिनों तक अपना सब काम -काज छोड़कर हुसैन की ज्यारत के लिये पैदल आने वाले लोगों के लिए बिछ जाते है । छ से आठ साल के बच्चों से लेकर अस्सी साल के बुजुर्ग भी बिना थके चौबीसों घंटे मुस्कुराते हुए सेवा मे तत्पर रहते है । रास्ते मे आने वाले सभी घरों के दरवाजे पदयात्रियों के लिये खुले रहते है घर वाले बड़ी अदब और ऐहतराम के साथ उनके घरों मे कुछ देर या रात आराम करने की गुजारिश करते है । थक गए हो तो आपके पैर दबाते है , सेंक करते है। आपके पास वजन ज्यादा हो तो वो लोग आपका वजन लेकर आपके साथ पैदल चलते है । दुनिया मे हुसैन के मानने वालो की क्या कद्र और इज्ज़त है अगर देखना हो तो इन दिनों यहां देखा जा सकता है । बेशक हुसैन की शान तो निराली है और उसके लिये तो शब्द है ही नहीं लेकिन जो हुसैन को मानने वाले है और जो उसके दर की ज्यारत के लिये जाते है उनकी क्या बुलंदी है यह इन दिनों कर्बला हमे बताती है ।

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